सब यहाँ प्रभु की रचना है,
फिर उनसे हमें क्यों बचना है.
वो भी तो आखिर इन्शान हैं,
उनके अंदर भी प्राण है.
वो भी है अंग समाज का,
क्या लिख सकते हो आज का... ??
कहते हम उनको किन्नर हैं,
उनका मन कितना सुन्दर है.
वो कितना जुल्म सह रहे,
फिर भी किसी को न कह रहे.
उनके एक आशीर्वाद को,
मिलते हैं लोग प्रशाद को.
जो करते उनको बदनाम हैं,
खुद उनका कैसा नाम है.. !
वो दबाय गए, सताए गए.... ;
पर फिर भी वो न हार सके,
कुछ भी कर उन्हें न झुका सके.
जब जब जन्मोत्शव हुआ,
उन्होंने आ दी दिल से दुआ.
आज फिर से समाज से कहना है,
हम सभी प्रभु की रचना हैं.
फिर क्यों उनसे हमें बचना है... ?
जब वो भी उनकी रचना है,
तो क्यों उनपे हमें हँसना है.
कहने को हम भारतवासी हैं,
हम भी "सोनू" सन्यासी हैं.
हर हर महादेव.
भागवताचार्य : नए भारत का उद्धोष करने वाले क्रांतिकारी.
युवा नेतृत्व, हिंदी रत्न.
"महाराज" सोनू तिवारी.
मो•8160851216.
जय माता दी
@kinnarokasansar
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